रामविलास शर्मा की लेखनी में डॉ आंबेडकर: एक आलोचनात्मक समीक्षा

     - रत्नेश कातुलकर हिन्दी साहित्य-जगत के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ रामविलास शर्मा अपनी प्रग्तीशीलता और मार्कस्वाद के प्रति अपनी निष्ठा के लिए जाने जाते हैं। इन्होने कमजोर तबको के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने की भरपूर कोशिश भी की है किन्तु इनकी लेखनी पर नज़र डालने पर हमे शर्मा जी की असलियत पता चलती है। [...]

दनकौर में दलित परिवार का उत्पीड़न : सभ्य समाज के चेहरे पर एक बदनुमा धब्बा

लूटपाट की घटना की एफआईआर लिखने के बजाय पुलिस के इस रवैए से दलित परिवार पूरी तरह क्षुब्ध हो गया। पीड़ित परिवार के एक सदस्य लक्ष्मण के मुताबिक, मारपीट करते हुए कपड़े पहले पुलिस ने ही खींच कर फाड़े, फिर बाद में बाकी सदस्यों ने भी गुस्से और क्षोभ में कपड़े फाड़ दिए और निर्वस्त्र विरोध जताना शुरू कर दिया।

हिंदुत्व की अराजकता का दौर

हकीकत यह है के मुसलमानो पर हमले होते रहेंगे ताकि उनके दलित विरोधी, आदिवासी विरोधी और पिछड़ा विरोधी नीतियों और कानूनो पर कोई बहस न हो। संघ प्रमुख ने आरक्षण पर हमला कर दिया है और ये कोई नयी बात नहीं है के साम्प्रदायिकता के अधिकांश पुजारी सामाजिक न्याय के घोर विरोधी है...

सवाल ? आरक्षण का

दलित आदिवासी और पिछड़े शिक्षित हो गए तो वे ब्राहमणवादी हिन्दूव्यवस्था, अंधविश्वास, जातिआधारित भेदभाव को खत्म कर देंगे आखिर हिन्दुधर्म की नीव तो इन आधारों पर ही टिकी हुई है.इसलिए ब्राहमणवादी व्यवस्था के कर्ता-धर्ताओं का मानना है यदि आरक्षण के खात्मे के लोगों को गुमराह किया जाये तो आरक्षण भी ख़त्म हो जायेगा...

दलेस में क्लेश : इतिहास और हकीकत

जेंडर के सवाल पर दलित लेखक संघ में कभी भी संवेदना नहीं देखी ....कोई भी संस्था अगर नियम और कानून से न चले तो उसे तनावों से गुजरना पड़ता है ।।... दलेस में कुछ तनाव हुए ।। उम्मीद है की इस बार तीसरे बड़े दलित लेखक सम्मेलन कराके करके सबके बीच की दूरी को कम किया जा सकेगा।

अच्छे दिन पीछे गए

भाजपा के मात्र एक साल के शासन के दौरान ही जिस तरह से दलितों पर हमलों में तेजी आई है उससे तो यही पता चलता है कि आने वाले वर्षों में दलित-बहुजनों का और भी बुरा हाल होने वाला है।

हिंदुत्व की अराजकता का दौर

हिंदुत्व की अराजकता का दौर हकीकत यह है के मुसलमानो पर हमले होते रहेंगे ताकि उनके दलित

सवाल ? आरक्षण का

सवाल ? आरक्षण का दलित आदिवासी और पिछड़े शिक्षित हो गए तो वे ब्राहमणवादी हिन्दूव्यवस्था,

अच्छे दिन पीछे गए

अच्छे दिन पीछे गए भाजपा के मात्र एक साल के शासन के दौरान ही जिस तरह

लेख

साक्षात्कार

महिला आंदोलन की कई धाराएँ हैं

[19 Mar 2015|(No Comments)] admin
महिला आंदोलन की कई धाराएँ हैं
पितृसत्ता में पुरुष भी बहुत पिटते हैं। अगर आप 6 फुट के नहीं हैं, 5 फुट 4 इंच तक रह गये, तो आप पितृसत्ता में पुरुष ही नहीं हैं।
साझा दर्पण

सुशान्त सुप्रिय की कविताएँ

[15 Dec 2014|(One Comment)] admin
सुशान्त सुप्रिय की कविताएँ
कविता मेरी आॅक्सीजन है । कविता मेरे रक्त में है , मज्जा में है । यह मेरी धमनियों में बहती है । यह मेरी हर साँस में समायी है ।
आलेख

रिवाल्वर रानी फूलन देवी नहीं है…

[3 May 2014|(One Comment)] admin
रिवाल्वर रानी फूलन देवी नहीं है…
फिल्म में कंगना रानाउत को चंबल की डाकू के रूप में दिखाया गया है जो अपने बाप की हत्या का बदला लेने के लिए डाकू बन जाती है। अल्का के
जीवनी

महात्मा जोतिबा फुले (1827-1890)

[11 Apr 2013|(No Comments)] admin
महात्मा जोतिबा फुले (1827-1890)
महात्मा फुले ने अपने जीवन में कभी दो मापदंड नहीं रखे उन्होंने जो भी चीज़े समाज के लिए हितकर पाई उसका उपदेश देने के बजाय पहले स्वयं ही अमल

वीडियो

परिचर्चा

बुद्ध का एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त अनीश्वरवाद : डॉ रत्नेश कातुलकर

[6 Oct 2016|(No Comments)] admin
आम तौर पर यह माना जाता है कि बुद्ध ने कभी ईश्वर के अस्तित्व पर कभी कोई विचार नहीं रखे। वे ईश्वर के विषय पर मौन थे। किन्तु यह एक
रिपोर्ट

दलित महिला अत्याचार और शहरी मध्यम वर्ग

[8 Mar 2014|(3 Comments)] admin
दलित महिला अत्याचार और शहरी मध्यम वर्ग
दलित-आदिवासी महिला के उत्पीडन के मामले में यह बार-बार सिद्ध हो चुका है कि राष्ट्रीय महिला आयोग कभी अपनी चुप्पी नहीं तोड़ता. अतः इसके निष्क्रिय रुख को देखते हुए ...
डॉक्युमेंट्री

डॉ जसप्रीत सिंह: द डेथ ऑफ मेरिट

[6 Dec 2012|(No Comments)] admin
डॉ जसप्रीत सिंह: द डेथ ऑफ मेरिट
अपने ४ वर्ष के एमबीबीएस के कोर्स में जसप्रीत कभी किसी विषय में फेल नहीं हुआ पर जब अपनी पढ़ाई के आखिरी साल में जब उसका सामना एक जातिवादी प्रो.
हमारे नायक

डा.बाबासाहेब आंबेडकर ( फिल्म्स डिविजन, 1991)

[5 Dec 2012|(No Comments)] admin
डा.बाबासाहेब आंबेडकर ( फिल्म्स डिविजन, 1991)
फिल्म्स डिविजन की बाबासाहेब आंबेडकर पर १ घंटे १४ मिनट लंबी ये डॉक्युमेंट्री (अंग्रेजी भाषा में) यंहा देखी जा सकती है

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